Notes

समोद्भिद …

समोद्भिद –
(1) समोद्भिद पौधे ऐसे जगहों पर उगते हैं, जहाँ के वातावरण में जलवायु न तो अधिक सुखी हो और न ही अधिक नम हों।।
(2) जड़ तन्त्र समोद्भिद पौधों में सुविकसित होता है।
(3) समोद्भिद पौधों की पत्तियाँ प्रायः बड़ी, चौड़ी तथा कई आकृतियों की होती है।
(4) रन्ध्र पत्तियों की दोनों सतहों पर उपस्थित होते हैं परन्तु निचली सतह पर अधिक होते हैं।
(5) समोद्भिद पौधों में पर्ण मध्योतक खम्भ व स्पंजी मृदूतक में भिन्नित होता है।