निर्वाण

गौतम बुद्ध के जीवन में निर्वाण का प्रतीक बौद्ध धर्म में पद-चिन्ह है।

जैन अनुश्रुतियों के अनुसार पार्श्वनाथ को 100 वर्ष की आयु में निर्वाण प्राप्त हुआ था।

जैन अनुश्रुतियों के अनुसार पार्श्वनाथ को कितने वर्ष की आयु में निर्वाण प्राप्त हुआ था?

पार्श्वनाथ को जैन अनुश्रुतियों के अनुसार निर्वाण सम्मेद पर्वत पर प्राप्त हुआ था।

बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य ‘निर्वाण’ का अर्थ ‘दीपक का बुझ जाना’ अर्थात् जीवन-मरण चक्र से मुक्त हो जाना है।

महावीर स्वामी को निर्वाण मल्लराजा सृस्तिपाल के राजप्रसाद में प्राप्त हुआ था।

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